बिरह और यादें

रास्ते

मुकाम

किसी ने चंद बेहतरीन पंक्तियां कही हैं (Someone has recited following great lines):

मुकाम तो वो चाहिए, कि…
जिस दिन भी हार जाऊं,
जीत खुद आ कर कहे…
माफ़ करना मज़बूरी थी !

– Anonymous